सहायक शिक्षकों के मांगों के बीच में रोड़ा अटका रहे विभागीय अधिकारी,,800 करोड़ के खर्च को 1600 करोड़ का बजट बताकर मुख्यमंत्री को कर रहे गुमराह The Demand Of Assistant Teachers Will Be Fulfilled In Only 800 Crore , Offisers Misleading The CM By Giving Wrong Figure Of 1600 Crore 

a2zkhabri.com रायपुर - सहायक शिक्षकों के मांगों के सन्दर्भ में विभागीय अधिकारी मुख्यमंत्री को गलत आकड़ा बताकर मांगों को अटका रहे है। सहायक शिक्षक फेडरेशन के  प्रान्त अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने बताया की प्रदेश के सभी सहायक शिक्षकों के मांगों की पूर्ति मात्र 812 करोड़ में ही हो जाएगी। वही विभागीय अधिकारी 1600 करोड़ का गलत आंकड़ा मुख्यमंत्री को बताकर सहायक शिक्षकों के मांगो को अटका रहे है। आज के बैठक में प्रमुख शिक्षा सचिव डॉ. अलोक शुक्ला सर के साथ दो घंटे की लम्बी बातचीत हुई। लेकिन वेतन विसंगति के निराकरण पर सहमति नहीं बनने के कारण दूसरे दौर का वार्ता भी विफल हो गया। 

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अधिकारी क्यों दे रहे गलत आकड़ा - आज के बैठक में यह बात सामने आई की शिक्षा विभाग के अधिकारी और गठित कमिटी के सदस्य सहायक शिक्षकों के मांगों के पूर्ति हेतु राशि की गणना को गलत क्यों कर रहे है। जहाँ सहायक शिक्षकों की मांग 812 करोड़ में हो जाएगी वही अधिकारी 1600 करोड़ का गलत आकड़ा मुख्यमंत्री को बताकर दिग्भ्रमित और गुमराह क्यों कर रहे है। वही मनीष मिश्रा ने कहा कि हम आज के बैठक में प्रमुख सचिव को सही आकड़ा बताये है  812 करोड़ की ही लागत आएगी। 

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सिर्फ कर्मचारियों के मांगों के लिए ही बजट का रोना क्यों,, अन्य मुद्दे पर बजट का जिक्र भी नहीं - जब भी कर्मचारी संगठन अपने जायज मांग की पूर्ति हेतु आंदोलन किया जाता है तब विभागीय अधिकारी सहित सरकार द्वारा बजट का रोना रोया जाता है। लेकिन अन्य मुद्दों पर इससे भी भारी भरकम बजट खर्च होता है तब बजट का कोई जिक्र भी नहीं होता। हमेशा कर्मचारी की मांगों के लिए ही बजट को बीच में क्यों लाया जाता है। वैसे भी सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति को दूर करने का वादा तत्कालीन राज्य सरकार ने किया है। अब सहायक शिक्षकों को गुमराह या आश्वाशन देने के बजाय सहायक शिक्षकों के मांगों को पूरा करके स्कूल को पढ़ाई हेतु  पुनः खोले जाने चाहिए। 

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क्या अधिकारी सहायक शिक्षकों के मांगो के पूरा होने में रोड़ा अटका रहे - सोशल मिडिया में चल रही चर्चा अनुसार और राज्य सरकार को बजट का गलत आंकड़ा प्रस्तुत करने पर यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या अधिकारी सहायक शिक्षकों के मांगों के पूर्ति होने में रोड़ा अटका रहे है। वही कमिटी द्वारा अभी तक रिपोर्ट नहीं सौपना , हड़ताल को 15 दिन होने के बाद भी वेतन विसंगति निराकरण कमिटी के सदस्यों का गहरी नींद में सोना कई सवालों को जन्म देती है। 

 प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को स्वयं सहायक शिक्षकों से बात करनी चाहिए। वहीँ मांगों के सन्दर्भ में माननीय मुख्यमंत्री को मांग पूरा होगा या नहीं होगा स्पष्ट कह देना चाहिए। जिससे सहायक शिक्षक आंदोलन को समाप्त कर अपने कर्तब्य पर उपस्थित हो जाएँ। कुल मिलकर हड़ताल का लम्बा खिंचा जाना प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य ख़राब करना है। अतः राज्य के मुख्यमंत्री और शिक्षकों को संवेदनशील होने का परिचय देते हुए जल्द से जल्द हड़ताल को समाप्त करने के दिशा में पहल करनी चाहिए।