शिक्षक है या डाकिया ,,, पढ़ाना लिखाना छोड़ दिन भर बना रहे डाक - शिक्षक नेता जाकेश साहू It Is A Teacher Or A Postman , Leaving Studies And Writing , Teachers Is Making Mail Throughout The Day

स्कूलों में पढ़ाई लिखाई का हुआ सत्यानाश,, रोज - रोज नए - नए आदेश से हलाकान गुरूजी , पढ़ाना लिखाना छोड़कर डाक बना रहे शिक्षक It Is A Teacher Or A Postman , Leaving Studies And Writing , Teachers Is Making Mail Throughout The Day 

a2zkhabri.com रायपुर - राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को बेवजह मानसिक रूप से प्रताड़ित व परेशान किया जा रहा है, स्कूल अब स्कूल नहीं बल्कि सिर्फ डाक तार विभाग बन कर रह गया है। जानकारी के नाम पर रोज - रोज शिक्षकों को बेवजह परेशान करने का काम किया जा रहा है। शिक्षक पढ़ाई लिखाई कम और जानकारी बनाने में ज्यादा ब्यस्त रहते है। 

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प्रदेश के प्रत्येक गांव में एक प्राइमरी स्कूल स्थापित है जंहा कम से कम दो शिक्षक पदस्थ है, मिडिल स्कुलो में न्यूतम तीन तथा हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में लगभग छह से सात शिक्षक पदस्थ है। दर्ज संख्या के अनुपात में स्कुलो में शिक्षकों की पदस्थापना हुई है। विभाग से संकुल फिर संकुल से स्कुलो को आजकल सिर्फ और सिर्फ डाक भेजे जा रहे है। एक दिन में कई डाक आ रहे है।

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उसी - उसी जानकारी को बार बार मंगा जाता है। स्कुलो में मरम्मत, स्टेशनरी एवं अन्य व्यय हेतु जो नाम मात्र का चार - पांच हजार रुपये आता भी है तो उसके व्यय की जानकारी एवं हिसाब वर्ष में अनेको बार मांगा जाता है। रोज - रोज नाना प्रकार की जानकारी बेवजह मंगाई जाती है, ऐसे - ऐसे जानकारियां मंगाई जाती है जिनका कि व्यावहारिक जीवन से न कोई मतलब है न ही उनका कंही कोई महत्व है। डाक इतने ज्यादा आ रहे कि सारे शिक्षकों का समय डाक बनाने में लग जा रहा है।

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परम्परागत पढ़ाई लिखाई का तरीका एवं परीक्षा पद्धति को बदलकर नया सिस्टम लागू किया गया है। परीक्षा के बाद पेपर चेक कर अंको को मोबाइल से अपलोड किया जाता है। शौचालय, किचन गार्डन, दिव्यांग शौचालय, स्कूल का सामने भाग सहित स्कूल के पूरे व्यवस्था का फोटो मोबाइल में अपलोड करना, मोबाइल से ही डाक एवं प्रपत्र का फोटो भेजना, मोबाइल से ही सारा जानकारी भेजना आदि कार्य शिक्षकों को ही करना पड़ रहा है।

शिक्षक एलबी संवर्ग के प्रांताध्यक्ष जाकेश साहू, ऋषी सिंहदेव राजपूत, भोजकुमार साहू, पुनीत चेलक, धरमदास बंजारे, विनोद मिश्रा, आजम खान, चेतन पटेल, कृष्णा साहू, दीपक कश्यप, धीरेंद्र साहू, बैजनाथ यादव, हरकेश भारती, देशन पटेल, ज्ञानेश्वर जामुल्कर सहित समस्त शिक्षकों ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा रोज रोज नित नए प्रयोग विभाग में किए जा रहे है। आजकल शिक्षक गुरुजी न होकर मोबाइल मेन व डाकिया बन गया है। सारा कार्य मोबाइल से कराया जा रहा है जिसके कारण शिक्षकों को दिनभर नेट चलाना पड़ रहा है, विभिन्न प्रकार की जानकारी दिनभर में कई कई बार प्रतिदिन आ रहा है, वह भी तत्काल तत्काल जानकारी बनाकर मंगा जा रहा है। 

विभिन्न जानकारियां मोबाइल से ही अपलोड करना पड़ रहा है। दिनभर मोबाइल के इस्तेमाल से अधिकांश शिक्षकों को सिरदर्द, आंख दर्द, कान दर्द, बहरापन, आंखों के आगे अंधेरा छाना, दिमागी टेंशन, चिड़चिड़ा पन सहित नाना प्रकार की बीमारियां शिक्षकों को हो रही है।

शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष जाकेश साहू ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल जी एवं राज्य सरकार से उक्त सभी मामलों में तुरन्त हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि शिक्षकों को सिर्फ शिक्षक ही रहने दिया जाय जिससे कि शिक्षक अपना पूरा समय बच्चों को पढ़ाने में लगा सके।प्रदेशाध्यक्ष जाकेश साहू ने विभाग को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि शिक्षकों से सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई लिखाई का ही कार्य कराया जाए न कि अन्य कार्य।

हमारी नियुक्ति बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई है न कि डाक बनाने और बाबूगिरी करने के लिए। 2009 के शिक्षा विभाग के सेटअप में प्रभारी/प्रधान पाठकों को भी शिक्षक माना गया है, प्रधान पाठक की भी गिनती शिक्षकों में की जाती है अतः शिक्षकों से अब बाबूगिरी का कार्य कतई नहीं कराया जा सकता।प्रदेश के किसी भी प्राइमरी स्कूल में शासन ने कम्प्यूटर व लैपटॉप की व्यवस्था नहीं की है जबकि सारा कार्य ऑनलाइन करने का निर्देश दिया जाता है। पुराने सभी बैंक खातों की जगह अब सिर्फ एक ही बैंक विशेष में खाता खोलने के निर्देश दिए जा रहे है।

राज्य के हजारों व्याख्याताओं एवं कई हजार शिक्षकों को संकुल प्राचार्य एवं संकुल समन्वयक बनाकर विभागीय कार्यो को सौंप दिया गया है जो पढ़ाई लिखाई को छोड़कर सिर्फ और सिर्फ विभागीय कार्यो में लगे हुए है जिससे सम्बन्धित स्कुलो की पढ़ाई लिखाई प्रभावित हो रही है। प्रदेश में चालीस हजार से अधिक संस्था प्रभारियों को दिन रात विभागीय कार्यो के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है, कार्य नहीं करने पर विभाग से निलम्बन अथवा विभागीय कार्यवाई की धमकियां दी जा रही है।दिन रात संकुलों के ग्रुप में हर वक्त विभागीय डाक आ रहे है, उक्त डाको को त्वरित बनाने हेतु दबाव बनाया जा रहा है। एक डाक बना नहीं कि दूसरा डाक आ जा रहा है। 

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1 Comments

  1. बिल्कुल सही बात हैं शिक्षा विभाग में पढ़ाई के नये नये तरीके अपनाए जा रहे हैं शिक्षक परेशान बच्चे भी परेशान

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