शिक्षकों को तोहफा - शिक्षा सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने लिखी "महामारी लेकिन पढ़ना लिखना जारी" शिक्षकों ( कोरोना योद्धाओं ) पर किताब Education Secretary Dr. Alok Shukla Wrote A Book Dedicated To Teachers

 शिक्षा सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने लिखी कोरोना काल ,में समर्पित शिक्षकों की गाथा , "महामारी लेकिन पढ़ना लिखना जारी" शिक्षकों के लिए खास तोहफा Education Secretary Dr. Alok Shukla Wrote A Book Dedicated To Teachers 


a2zkhabri.com रायपुर - छत्तीसगढ़ 1986 बैच के आईएएस अफसर और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने कोरोना काल में बेहतर काम करने वाले शिक्षकों की गाथा लिखी है। करीब 150 पेज की इस किताब में शिक्षकों को कोरोना योद्धाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। किताब का शीर्षक है - "महामारी लेकिन पढ़ना लिखना जारी"। 

इस किताब पर 40 थीम पर उन शिक्षकों की कहानियां है , जिन्होंने कोरोना के दौरान अपने जान की परवाह किये बगैर न केवल बच्चों की पढाई जारी रखी , बल्कि संसाधनों के आभाव को भी आड़े आने नहीं दिया। इतना ही नहीं।  एक शिक्षक के उदहारण को पुरे प्रदेश में लागु किया गया। 

उदहारण के लिए कोरोना काल में पढ़ाने के लिए अपनाएं गए तरीकों में पढई तुंहर दुआर के तहत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से इंटरनेट मिडिया के सहारे पढ़ाई करवाने वाले शिक्षक , लाउडस्पीकर से गांव में पहली बार बच्चों को पढ़ाना ,  मोटर सायकल गुरूजी की थीम पर मोटर सायकल पर सवार होकर शिक्षक श्यामपट लेकर घूम - घूम कर पढ़ाते नजर आए। कुछ शिक्षक तो वर्क शीट पर पढाई करवाते दिखे। मोहल्ला पाठशाला में शिक्षकों की जगह मोहल्ले में बड़े भाई , बहन , बहु और बेटियों ने पढ़ाई की जिम्मेदारी ली और शिक्षकों ने सहयोग किया। 

कठिन हालातों में भी शिक्षा की अलख - प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला कहते है कि यह किताब कोरोना संक्रमण काल में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों की ओर से किए गए नवाचारों और कठिन हालातों में भी शिक्षा की अलग जगाए रखने के प्रयासों का उदहारण प्रस्तुत करने वाला दस्तावेज साबित होगा। 

ऐसे किया शिक्षकों का चयन - किताब में शिक्षकों की कहानियों के चयन का आधार क्या था ? इस पर डॉ. आलोक शुक्ला कहते है कि यह बताना बहुत कठिन है। हमने 40 अलग - अलग थीम पर बच्चों को अपने स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों की कहानी के माध्यम से समाज  को यह बताने की कोशिश की है कि हालत कुछ भी हो कुछ करने का हौसला हमेशा बरक़रार रखना चाहिए। 

ऐसे मिली लिखने की प्रेरणा - वैसे तो डॉ. आलोक शुक्ला ने कई किताब लिखे है पर "महामारी लेकिन पढ़ना लिखना जारी " पुस्तक लिखने के पीछे की वजह बहुत रोचक है। कोरोना के दौरान प्रमुख सचिव ने प्रदेश के 28 जिलों के 70 विकास खण्डों अकेले ही दौरा किये है। इस दौरान उन्होंने देखा की कुछ शिक्षक पूरी लगन के साथ कुछः करने के जुनून के साथ बच्चों को पढ़ाने में लगे हुए है। उन्होंने इन शिक्षकों को अपनी लेखनी के माध्यम से तोहफा देने की मन बना लिया और इस किताब में वह सब कुछ लिख डाला , जिसे प्रोटोकॉल के कारण बोल नहीं पाते। 

शिक्षक समुदाय गौरवान्वित - कोरोना संकट काल में जिस प्रकार से बहुत से शिक्षकों ने पूरी लगन से बच्चों को पढ़ाने के विभिन्न तरीके निकालते रहे वह वाकई काबिले तारीफ है। शिक्षा सचिव लिखित किताब शिक्षकों के हौसलों को और उड़ान देने वाली किताब साबित होगी। "महामारी लेकिन पढ़ना लिखना जारी " किताब कर्मवीर शिक्षकों को समर्पित है , वाकई इस किताब  शिक्षक समुदाय गौरवान्वित महसूस करेगा। 

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